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जानें किन कारणों से होता है पेचिश, ये 5 घरेलू उपचार दे सकते हैं राहत
पेट लगातार दरà¥à¤¦ हो रहा है तो इसे इगà¥à¤¨à¥‹à¤° न करें.
पेचिश (Dysentery) पेट की बीमारी है, जो खूनी दसà¥à¤¤ का कारण बनती है. यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है जो आंतों (Intestine) में होता है और पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ का कारण बनता है. इसलिठपेचिश के मामले में तà¥à¤°à¤‚त इलाज किया जाना चाहिà¤, à¤à¤¸à¤¾ न होने पर इसके गंà¤à¥€à¤° परिणाम हो सकते हैं. आंतों का यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या पैरासाइटिस की वजह से होता है. अमीबा के कारण अगर यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ हà¥à¤† हो तो गंà¤à¥€à¤° खूनी दसà¥à¤¤ à¤à¥€ हो सकते हैं. पैरासाइटिस का à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार अमीबा है जो दूषित खाने और पीने की चीजों में पाठजाते हैं. जब इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खाया जाता है तो ये मà¥à¤‚ह के जरिठशरीर में जाते हैं. दूषित खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के अलावा संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हाथ ठीक से न धोने से à¤à¥€ फैल सकता है. पेचिश का जोखिम तब बढ़ जाता है जब पोषण की कमी, शराब की लत, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ हो, या फिर उस जगह की यातà¥à¤°à¤¾ करना जहां संकà¥à¤°à¤®à¤£ फैला हà¥à¤† हो.
इससे बचने के लिठसबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है हाथ धोना. बीमारी फैलने से रोकने के लिठबेहतर होगा कि टॉयलेट जाने के बाद हाथों को अचà¥à¤›à¥‡ से साबà¥à¤¨ से धोà¤à¤‚, उबला पानी पीà¤à¤‚, गंदे कपड़ों, बिसà¥à¤¤à¤° और तौलिठको गरà¥à¤® पानी में धोà¤à¤‚. यही नहीं टॉयलेट सीट, वॉश बेसिन, नल आदि को इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² के बाद डिटरà¥à¤œà¥‡à¤‚ट में धोà¤à¤‚.
पेचिश डायरिया रोग की तरह होता है, लेकिन इसमें कà¥à¤› असमानताà¤à¤‚ à¤à¥€ होती हैं. पेचिश बड़ी आंत या पेट में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है. पेचिश में आराम पाने के लिठकà¥à¤› सरल घरेलू उपाय अपना सकते हैं.
यदि रोगी को पेट दरà¥à¤¦ के साथ-साथ बà¥à¤–ार, कंपकंपी, उलà¥à¤Ÿà¥€ और खूनी दसà¥à¤¤ à¤à¥€ हैं तो इसका मतलब है कि रोगी पेचिश से पीड़ित है. इस रोग में रोगी को बार-बार पेट में à¤à¤‚ठन होती है और मल के साथ बलगम à¤à¥€ आता है. पेचिश 8 से 10 दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन रोगी को इसमें कई सावधानियां बरतनी चाहिà¤. दूध या दूध से बने उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ को पचाने में पेचिश से पीड़ित लोगों को परेशानी होती है. इसे लेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इंटोलेरेंस यानी लेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ असहनशीलता कहा जाता है. यह कई बार महीनों या सालों बनी रह सकती है.
नींबू
नींबू में à¤à¤‚टीबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं जो पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में होने वाले संकà¥à¤°à¤®à¤£ का इलाज करते हैं. साथ ही इसमें मौजूद à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट शरीर को पेचिश के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से दूर कर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखता है. नींबू के टà¥à¤•ड़ों को काटकर गरà¥à¤® पानी में कà¥à¤› मिनट उबलने दें. फिर इसे छान ले और मिशà¥à¤°à¤£ को पी लें. दिन में कई बार इसे दोहराà¤à¤‚ फायदा मिलेगा.
दही और हलà¥à¤¦à¥€
दही का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² पेचिश दूर करने में काम आ सकता है. दही में माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² आंत और कोलन को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रखते हैं. वहीं हलà¥à¤¦à¥€ के पाउडर में à¤à¤‚टीमाइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं जो शरीर को अंदर और बाहर से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखते हैं. दही में हलà¥à¤¦à¥€ पाउडर, हींग, नमक, करी पतà¥à¤¤à¤¾ मिलाकर मिशà¥à¤°à¤£ बना लें और फिर उबाल लें. ठंडा होने पर पी जाà¤à¤‚. दो या तीन बार दिनà¤à¤° में यह काम करें.
सेब का सिरका
सेब का सिरका उन बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से लड़ने में मदद करता है, जिसके कारण पेचिश होता है. सेब के सिरके को पानी में मिलाकर पी जाà¤à¤‚. आराम नहीं मिले तो आधे घंटे बाद फिर इस मिशà¥à¤°à¤£ को पिà¤à¤‚.
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾ पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मजबूत बनाता है. पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के जूस में नीबू का रस और शहद मिलकर इसका सेवन करें. दिन में दो-तीन बार करने से फायदा होगा.
केला
केले के गूदे को निकालकर मैश कर लें और इसे छाछ में मिलाकर इसका सेवन करें. केला पेचिश के इलाज में बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ होता है. पोटेशियम से समृदà¥à¤§ केला पेट में फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के सिंथेसिस को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करता है। पेट की सूजन को आराम पहà¥à¤‚चकर पेचिश दूर करता है.
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