पेचिश में क्या खाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Mon 19th Dec 2022 : 12:47

जानें किन कारणों से होता है पेचिश, ये 5 घरेलू उपचार दे सकते हैं राहत

पेट लगातार दर्द हो रहा है तो इसे इग्नोर न करें.
पेचिश (Dysentery) पेट की बीमारी है, जो खूनी दस्त का कारण बनती है. यह एक प्रकार के संक्रमण के रूप में भी जाना जाता है जो आंतों (Intestine) में होता है और पेट के निचले हिस्से में गंभीर दर्द का कारण बनता है. इसलिए पेचिश के मामले में तुरंत इलाज किया जाना चाहिए, ऐसा न होने पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. आंतों का यह संक्रमण बैक्टीरिया या पैरासाइटिस की वजह से होता है. अमीबा के कारण अगर यह संक्रमण हुआ हो तो गंभीर खूनी दस्त भी हो सकते हैं. पैरासाइटिस का एक प्रकार अमीबा है जो दूषित खाने और पीने की चीजों में पाए जाते हैं. जब इन्हें खाया जाता है तो ये मुंह के जरिए शरीर में जाते हैं. दूषित खाद्य पदार्थों के अलावा संक्रमित लोगों द्वारा हाथ ठीक से न धोने से भी फैल सकता है. पेचिश का जोखिम तब बढ़ जाता है जब पोषण की कमी, शराब की लत, गर्भावस्था हो, या फिर उस जगह की यात्रा करना जहां संक्रमण फैला हुआ हो.

इससे बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है हाथ धोना. बीमारी फैलने से रोकने के लिए बेहतर होगा कि टॉयलेट जाने के बाद हाथों को अच्छे से साबुन से धोएं, उबला पानी पीएं, गंदे कपड़ों, बिस्तर और तौलिए को गर्म पानी में धोएं. यही नहीं टॉयलेट सीट, वॉश बेसिन, नल आदि को इस्तेमाल के बाद डिटर्जेंट में धोएं.

पेचिश डायरिया रोग की तरह होता है, लेकिन इसमें कुछ असमानताएं भी होती हैं. पेचिश बड़ी आंत या पेट में संक्रमण के कारण होता है. पेचिश में आराम पाने के लिए कुछ सरल घरेलू उपाय अपना सकते हैं.

यदि रोगी को पेट दर्द के साथ-साथ बुखार, कंपकंपी, उल्टी और खूनी दस्त भी हैं तो इसका मतलब है कि रोगी पेचिश से पीड़ित है. इस रोग में रोगी को बार-बार पेट में ऐंठन होती है और मल के साथ बलगम भी आता है. पेचिश 8 से 10 दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन रोगी को इसमें कई सावधानियां बरतनी चाहिए. दूध या दूध से बने उत्पादों को पचाने में पेचिश से पीड़ित लोगों को परेशानी होती है. इसे लेक्टोज इंटोलेरेंस यानी लेक्टोज के प्रति असहनशीलता कहा जाता है. यह कई बार महीनों या सालों बनी रह सकती है.

नींबू
नींबू में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो पाचन क्रिया में होने वाले संक्रमण का इलाज करते हैं. साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को पेचिश के लक्षणों से दूर कर स्वस्थ रखता है. नींबू के टुकड़ों को काटकर गर्म पानी में कुछ मिनट उबलने दें. फिर इसे छान ले और मिश्रण को पी लें. दिन में कई बार इसे दोहराएं फायदा मिलेगा.

दही और हल्दी
दही का इस्तेमाल पेचिश दूर करने में काम आ सकता है. दही में माइक्रोबियल आंत और कोलन को संतुलित रखते हैं. वहीं हल्दी के पाउडर में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो शरीर को अंदर और बाहर से स्वस्थ रखते हैं. दही में हल्दी पाउडर, हींग, नमक, करी पत्ता मिलाकर मिश्रण बना लें और फिर उबाल लें. ठंडा होने पर पी जाएं. दो या तीन बार दिनभर में यह काम करें.

सेब का सिरका
सेब का सिरका उन बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है, जिसके कारण पेचिश होता है. सेब के सिरके को पानी में मिलाकर पी जाएं. आराम नहीं मिले तो आधे घंटे बाद फिर इस मिश्रण को पिएं.

पुदीना
पुदीना पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है. पुदीने के जूस में नीबू का रस और शहद मिलकर इसका सेवन करें. दिन में दो-तीन बार करने से फायदा होगा.

केला
केले के गूदे को निकालकर मैश कर लें और इसे छाछ में मिलाकर इसका सेवन करें. केला पेचिश के इलाज में बहुत प्रभावी होता है. पोटेशियम से समृद्ध केला पेट में फैटी एसिड के सिंथेसिस को उत्तेजित करता है। पेट की सूजन को आराम पहुंचकर पेचिश दूर करता है.

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